Monthly Archives: March 2011

जानिब-ऐ-मंजिल

Yuvraj winnig shotThis is the poem written for Team India and lets hope that they continue their form and get the World Cup for us. All the best to Men In Blue.

पहला कदम बढाया तूने जानिब-ऐ-मंजिल
अब न रुकेगा और न ही थमेगा तू
किये बिना उसको हासिल!

मुश्किल है सफ़र
कठिन है राह
पर तू बढ़ता चल
जिस तरफ है तेरी चाह

तेरा सपना
तेरी हिम्मत
तेरे हौसले से
पथ प्रकाशित है
एकाग्र हो कर बढ़ता चल
जिस तरफ तेरी मंजिल है

मंजिल हासिल करने का एहसास
रास्ते के सब पीड मिटा देगा
तुझे विजयी बना देगा
अब खुद से किया वादा निभाना है
अपनी मंजिल को हर हाल में पाना है!!

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जज़्बा!

जज़्बा……

आसमान छूने का

खुद को आज़माने का

मुश्किलों में हौसला क़ायम रखने का

रुकावटों को रौंदते जाने का

अंधेरों में शमा जलाने का

मेहनत से आगे बढ़ते जाने का

कुछ कर के दिखाने का

अपने अरमानों को कामिल करने का

ऐ जज़्बा-ऐ-दिल गर मैं चाहूं
तो हर मंजिल मुयस्सर हो जाए!!

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