Monthly Archives: August 2011

Hindi Poem: Revolution/Corruption

चिंगारी जो दिल में थी अब भड़क गयी है

देश की जनता अब जग गयी है

लिए तिरंगा हाथों में

आज वो सड़क पर उतर गयी है…..

ये  नज़ारा  अद्भुत  है

नव  भारत  निर्माण  की  कोशिश  है

देख  अपने  लोगों  का  जूनून

भारत  माता  भी  सगर्वित  हो  गयी  है

देश  की  जनता  अब  जग  गयी  है….

नहीं  रुकेंगे  नहीं  थकेंगे

बिना  मंजिल  को  पाए

अब  तो  यह  संकल्प

जन  जन  दोहराए

चिंगारी  जो  दिल  में  थी  अब  भड़क  गयी  है

आवाम  अब  जग  गयी  है………….

संघर्ष  अब  ये  मुल्क  का  है

मशाल  जोश  की  अब  आंधी  में  भी  प्रज्वल्लित  है

टूटेंगे  किन्तु  झुकेंगे  नहीं

जज्बा  ये  अब  हर  क़दम  में  है

लड़ेंगे  जब  तक  दम  में  दम  है

चिंगारी  जो  दिल  में  थी  अब  भड़क  गयी  है….

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Hindi Poem on CORRUPTION!

Mil Gayi Azaadi par Inquilab ab bhi Jaari Hai

Naye Bharat ke Nirman Ki Jimmedari ab hamari hai

Nikal aaye hain ham ghar se, mila liye hain jab haath

To Dikhne lagi seyaasat daan ki lachaari hai

Kya karein – wo to bhrashtachari hai

Par ab hamare junoon ke aage unke sab daanv bekaari hai

ukhad fenkna hai bhrashtachar ko jo mulq ki sabse badi bimari hai

Mil Gayi Azaadi par Inquilab ab bhi Jaari Hai……

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