Monthly Archives: May 2012

In Loving Memory of Tauji!

Tauji

Words cannot express what we feel
your departure from us is tough indeed

You have been guiding force in our lives

without you we all are emptied

You have been the foundation of our family
Holding us together in cheer and despair

You were like a big tall tree

Smiling and bestowing love on every dear


During the time when greed is everywhere
Your character is a flare
you never deviated from your credo
which is difficult to be seen elsewhere

Your life is a constant source of inspiration
Your morals, values and ethics
will light our path in darkness
And will provide much needed motivation

You have left an eternal impact
Your teachings and beliefs will forever be etched in our heart
You will be remembered by one and all
you’ll always be real close, even though we’re far apart

Today you have left for your heavenly abode
God will welcome you with open arms
You’ll be a shining star
no matter how far away you seem
You’ll forever remain in our heart!!

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Hindi Poem on Dowry- दहेज़: एक कुरीति!

खुश खबरी दोस्तों, राने की शादी तय हो गयी
अरे भौतिकी की डिग्री मिलते ही उसकी कीमत दोगुनी हो गयी
घर वालों ने नन्हे की शादी के दहेज़ के लिए मार्केट सर्वे किया
कैसे चूसना है लड़की वालों को इस पर चर्चा किया
तय किया के आएगी लड़की एक संपन परिवार से
पूरी हो सके फरमाइश एक इशारे से
सामान की लिस्ट तैयार हुई
फ्रिज, टीवी, ऐसी, फर्नीचर, सोना, चांदी, नकदी की डिमांड हुई
शादी तय होने से ले कर बरात उठने तक रोज़ मांग बढती गयी
बेटी की ख़ुशी समझते हुए लड़की वाले सभी मांग पूरी करते गए
बरात चलने को तैयार खड़ी थी की याद आया
चौपहिया वाहन तो नोट करवाना भूल ही गए
समधी को बोला मांग पूरी करो तभी बरात आएगी द्वार पर
नहीं तो जान देनी पद जायेगी बेटी को बाबुल के द्वार पर
मांग पूरी हुई, राने की शादी बहुत धूम धाम से हुई
बहू घर आ गयी पर राने और घरवालो की भूख बढती चली गयी
प्रतिदिन उनकी अपेक्षा बढती गयी
प्रताड़ित किया बहू को ससुराल वालों ने
दिखाई राने ने मर्दानगी एक औरत को धमकाने में
बहू ने जब किया विरोध तो कैद किया उसे वीराने में
जल गए उसके सारे अरमान अनुचित अभिलाषा के कारण!!
जल गए उसके सारे अरमान अनुचित अभिलाषा के कारण!!

दहेज़ एक ऐसी कुरीति है जिस पर समाज की मुहर है
क्या शिक्षित और क्या निरक्षर
सब के मन में घर करती, दहेज़ एक ऐसी लालच
दहेज़ एक ऐसी लालच जिसे शिक्षा भी दूर नहीं कर पा रही है
क्यूंकि मानव का आचरण दुर्बल हो गया है
दुर्भाग्य देखो भारत का, २१वी सदी के विचारों का
नव-युवक दहेज़ को हक समझते हैं
कमाते हैं लाखों पर क़त्ल करते हैं आदर्शों का
बेरीढ़ हो रहे है मुल्क के नौजवान
मर रहा है आत्मसम्मान
मान-मर्यादा बह गयी लालच की इस दरिया में
डूब गया स्वाभिमान इस मंज़र में
गिर गया वो अपनी ही नज़रों में
कैसे आदमी का स्वरुप इतना धूमिल हो गया
क्यूँ उसका इतना नैतिक पतन हो गया?


मेरा भारत महान कहने से महान नहीं बनता है
महान बनता है मेरे और तुम्हारे विचारों से
कुंठित मानसिकता ध्वंस की सूचक है
दहेज़ समाज के लिए विनाशकारी है
नहीं बने हम लकीर के फ़कीर
उठो और निर्मित करो चरित्रबल
मिटा दो फैला तम अपने समाज से
कभी न विचलित हो बाधाओं के आने से
नव भारत की नींव रखे नए विचारों से!!

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Poem: Jai Khalifa!!

Aaj kai mahino baad khalifa ke 4 sadasya saath hue

Kisse, baatein or tarane saath hue

2 din mein kuch purani yaadein taaza hui

Aur kuch naye adhyaye jode gaye.

Guru aur Chaturvedi ke Mumbai ke pehle safar ko Tulla ne “10 min walking” se haseen kiya

To PD ke hamesha ki late lateefi ne uss ko aur haseen kar diya

Siddhi Vinayak, Mahalaxmi aur Haji Ali par maatha tikaya gaya

Marine Drive Par Saagar ko door se nihara gaya

Bandstand par samundar ko chua gaya

Aur kuch haseen pal ko jeevan bhar camera mein qaid kiya gaya

Guru ne apne “Ho Sakne Wale” Prem se milaap kiya

to Chaturvedi ne Bhabhi ke liye Linking Road se Hand bag hathiya liya

Tulla ne jeevan mein pehli baar Levis ki Shirt utha liya

Pd ne yeh sara waqt Juice peene mein guzaar diya.

Ghar, Zindagi, naukri aur chokri par gahan shodh hua

Par Chokri ne sabko jod diya

Non Strikers ne Strikers ko saraha

To Strikers ne Non Strikers ko sahi bata diya

Hansi-Mazaak ne sama baandh diya

Yaaron ki yeh mehfil yun hi jamti rahe

Aur Khalifaon ki yeh dosti nayi unchaai par chadhti rahe

Masti to bahut ki par

Kuch Logon ki kami bahut khali

Ummed hai ki jald hi hum sabhi fir se milenge

Jo kami reh gayi use poora kar daalenge.

Jai Khalifa!!

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Poem: Sansad ke 60 Saal!

आज सदन ने ६० साल पूरे किये हैं

इस अवसर पर विशेष बैठक बुलाई गयी

सांसदों के बौद्धिक कथनों को सुनकर मैं हैरान हो गया

अरे एक ही दिन में ये परिवर्तन कैसे आ गया

कल ही तो सभी एक ६३ साल पुराने कार्टून पर गुर्रा रहे थे

आज वही संसद की गरिमा की बात कर रहे थे

हैरान परेशान मैंने चैम्प को फोन लगाया

पूछा भाई एकता को देखा

कौनसी एकता: मुंबई वाली या लखनऊ वाली

मैंने कहा नहीं यार दिल्ली वाली

दिल्ली में हम किसी एकता को जानते है क्या?

नहीं भाई आज ही दिखी है संसद में

संसद में?

हाँ भाई संसद में, वो भी सांसदों के बीच

क्या बात कर रहा है

सही बात कर रहा हूँ, वो भी सबके सामने

यकीन नहीं होता

पहले तो ये एकता सिर्फ खुद की

तनख्वा और भत्ते बढ़ाने के लिए दिखती थी,

वो भी परदे के पीछे

आज ये बदलाव कैसे आ गया?

संसद के ६०वी वर्षगाँठ पर

देश को फिर से “बनाने” का प्रोग्राम है

तभी तो गरिमा का प्रस्ताव भी पारित हो गया

यार अब ये गरिमा कहाँ से आ गयी?

कहीं ये वही गरिमा तो नहीं

जिसे २००८ में अमर सिंह संसद से बाहर फेंक कर आया था

हाँ भाई ये वही वाली है

और सांसदों ने ये भी कसम खायी है की

वो संसद की कार्यवाही में बाधा नहीं डालेंगे

ऐसा तो मुमकिन ही नहीं है

क्यूँ यार?

अगर संसद स्थगित नहीं होगी तो वहां बैठ कर हमारे संसद करेंगे क्या

उनके पास तो सिर्फ अपनी प्रगति की नीति और प्रस्ताव हैं

देश उन्नति और सेवा की बात करनी पड़ी तो वे अटपटा महसूस करेंगे

देश से तो उनका मीलों तक कोई नाता नहीं है भाई

संसद स्थगित, सांसद बाहर,

चाय-पकौड़े खाए, जनता के पैसे उड़ाए और संसद सत्र समाप्त!

६० सालों में लोकतंत्र में बदलाव आया है

सांसदों के व्यवहार और सोच में बदलाव आया है

देश सेवा की परिभाषा में बदलाव आया है

देश-उन्नति की बात अब बेमानी लगती है

दुआ करता हूँ की सांसदों में शर्म आये

अपनी नहीं तो संसद की लाज बचाएँ!!

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Poem: Man Without Courage!

You man, without courage
have lost your right to live
You claim to belong to a civilized society
but you turned blind eye
when the society was being torn apart
you succumbed to the pressure
when you were required to stand
you became defunct
when the duties were to be performed
you got intimidated
when you were needed the most
you have become a liability to the same “civilized” society
You are “Man” without courage
And there is no justification for that
There shall be no funeral for you
as deep inside you, you are already dead!

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