Monthly Archives: July 2012

Hindi Story: Aakhir Kiske Liye?

न समझो तो मिट जाओगे ऐ हिंदुस्तान वालों
तुम्हारी दास्ताँ तक न होगी दास्तानों में!!


एक सैनिक के लिए देश पर कुर्बान हो जाने से बढ़कर गौरव नहीं होता है! हर सैनीक के दिल का यही जज्बा ने हमारी स्वतंत्रता को बरक़रार रखा है! अगर हमारे सैनीक अपने कर्त्तव्य से पीछे हट जाएँ तो हमारे देश को गुलामी की जंजीरों में फ़ीर से जकड़ने में ज्यादा समय नहीं लगेगा! देश के एक सैनीक और देशवासियों में एक अनकहा करार होता है जिसके अंतर्गत सैनीक को यह भरोसा होता है की अगर अपने देश की अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा करते हुए उसके प्राण भी जाते हैं तो देश के जनता, देश की सर्कार उसके परिवार का भली भाँती ख्याल रखेगे! एक सैनीक इसी विश्वास के साथ रण भूमि में उतरता है और अपने कर्त्तव्य को पूर्ण करता है, परन्तु क्या हमने अपने उस करार को निभाया है?
मुझे ऐसे लगता है की एकाध लोगों को छोड़ दिया जाए तो शेष लोगों को इससे कोई लेना देना नहीं होता की एक शहीद का परिवार किन परिस्थितियों से गुजरता है!
मेरे बेटे को आज गुजरे हुए ढाई साल हो गए हैं! वह भारतीय सेना में जवान था और सरहद पर  आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में वह शहीद हो गया! दो वर्ष पूर्व स्वाधीनता दिवस के दिनों उसे महावीर चक्र से नवाजा था! पर मैं आज भी मेरे दील को विश्वास नहीं होता की मेरा नवीन अब कभी मुझे पापा कहकर नहीं बुलाएगा! उसके शहीद होने की जब खबर मिली तो ऐसे लगा की पल ठहर सा गया हो, जीवन में उथल पुथल मच गयी और एक जवान बेटे के लिए जो अरमान थे वो एक ही पल में बिखर गए! नवीन की माँ उस दिन से बिलकुल चुप हो गयी है!
नवीन की शवयात्रा में लाखों का जुलूस सड़क पर उतर आया था और बड़े बड़े राजनेताओं ने भी अपने “कर कमलों” द्वारा “पुष्प चक्र” चढा कर श्रद्धांजलि दी थी! सरकार ने भी मुआवजे का एलान कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी!
ज़िन्दगी की यह भी एक सच्चाई है की ज़िन्दगी कभी झुकती नहीं, साँसे रुकती हैं पर ज़िन्दगी कभी रुकती नहीं! ज़िन्दगी को दुबारा चलाने के लिए सरकारी मुआवजे के लिए एक दफ्तर से दुसरे दफ्टर का चक्कर काट रहा हूँ, पर कीसी के कानों पर एक पिता की फरियाद नहीं पड़ रही है! सरकारी बाबू को ज़मीन आवंटित करने के लिए अपना हिस्सा चाहिए! उसका कहना है की “तुम्हारे बेटे ने देश के लिए जान दे दी तो उससे मुझे क्या करना! जब तक मेरा लाभ नहीं होगा तब तक…..!” उसके इस कथन ने अन्दर से झकझोर कर रख दिया! ऐसे प्रतीत होता है की लोग एक शहीद के परिवार की तरफ जो हमदर्दी रखते हैं वो एक छल है! दो साल पहले पूरे गाँव ने वीर सपूत का गुण गान किया पर आज चौराहे पर लगी उसकी प्रतिमा भी लोगों को उसकी कुर्बानी याद नहीं दिलाती! आज उसके परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं है! हुक्मरानों ने नवीन की शहादत पर भी राजनीती की और अपनी झोलियाँ भरी!
आज मेरी सहनशीलता जवाब दे चुकी है और रह रह कर यही सवाल जेहन में आता है की क्यों मेरे बेटे ने उस अनजान व्यक्ति के लिए अपने प्राण दे दिए जो उसकी क़द्र नहीं करता है! आज के युग जब इंसान सिर्फ स्वार्थ में जीता है तो क्यूँ नहीं मेरे बेटे ने अपने घरवालों के बारे में, अपनी जिम्मेदारियों के बारे में और अपने बारे में सोचा? आखिर किसके लिए मेरे बेटे ने शहादत दी? उन लोगों के लिए जो आज उसे भूल चुके है, या उन सरकारी मंत्रियों के लिए जिनकी नकारता की कीमत मेरे बेटे ने चुकाई है? “वीरों की भाँती मृत्यु” जैसा कलाम इस संसार में नहीं होता है! जीवन और मृत्यु ही सच्चाई है! आज जब पूरा देश पंद्रह अगस्त की तैयारी कर रहा है तो बस मैं उनसे एक ही सवाल करना चाहता हूँ की आखिर किसके लिए?

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Hindi Poem: Vartman ka Launda!!

हिन्दुस्तान में वर्तमान का लौंडा सबसे हारा हुआ है

ये वो लौंडा है जिसे अपने चेहरे पर लज्जा है

जिसे उसने FAIR & HANDSOME से सजा रखा है

रंग के नाम पर भेदभाव को विदेशी कम्पनी ने जब बढाया

तब हमने दोनों हाथ खोल उसे गले लगाया

जिस देश के बेटों ने सदियों तक उसका गौरव बढाया

आज उन्ही बेटों के बड़े हिस्से ने खुद को

लौंडिया के नाम पर लुटाया

कभी भी हार न मानने के जज्बे को

इश्क की चिड़िया ने हवा में उड़ाया

METROSEXUAL बनने की होड़ में अपनी MASCULINITY को गंवाया

GLOBALIZATION के दौर में हमने अपनी अस्मिता को भुलाया

अपनी संस्कृति, विचार और आदर्शों को ठोकर मार गिराया

विदेशी ज़मीन पर बसने की तमन्ना ने

सरज़मीन-ऐ-हिंदुस्तान को बहुत रुलाया

माँ-बाप घर परिवार छोड़

उस लौंडे ने सारा ध्यान कागज़ के चंद टुकडों को कमाने में लगाया

आज वो इतना थक चुका है

की उसे मुल्क की पुकार सुनाई नहीं देती

उदासीन रवैये ने शहीदों की रूह को छलनी किया

जो आजादी मुफ्त में मिली थी उसे मिट्टी में मिलाया

आज के लौंडे ने अपनी मर्दानगी को कमजोरों पर दिखाया

जब बात आई सीने पर गोली खाने की

तो देख कैसे अपनी पीठ दिखाया

ये वही देश है जहाँ पर वीर रस गाये जाते थे

आज उसी धरती पर क्रांतिकारियों को गाली दी जाती है

और आतंकियों को नेता, जनता के पैसे की बिरयानी परोसते हैं

और ये सब देख कर भी लौंडे की ज़बान खुलती नहीं

क्यूंकि हिन्दुस्तान में वर्तमान का लौंडा सबसे हारा हुआ है!!

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