Oct 21
Hindi Poem: Let this Diwali be Different
Family, Festivals, Friends, Society No Comments »आओ इस दीपावली कुछ नया करें
आओ इस दीपावली कुछ नया करें
४ फुलझड़ी कम जालयें
उस कीमत से
दो घर और रोशन करें
दीपों की जगमगाहट में
ज़रा ख्याल इसका करें
पर्यावरण को नुकसान कम से कम करें
खुशियों के इस पर्व में
इक पल आँखें नम करें
याद शहीदों के बलिदान को करें
दो दीप उनके लिए प्रज्ज्वलित करें
समाज के उद्धार के लिए पयत्न करें
फैली बुराइयों का अंत करें
राष्ट्रीयता को अपने अन्दर घर करें
आओ इस दीपावली कुछ नया करें !!!!