Category Archives: Motivation

Poem by Harivansh Bachchan!

मैं हूँ उनके साथ, खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़ – हरिवंश राय बच्चन

कभी नही जो तज सकते हैं, अपना न्यायोचित अधिकार
कभी नही जो सह सकते हैं, शीश नवाकर अत्याचार
एक अकेले हों, या उनके साथ खड़ी हो भारी भीड़

मैं हूँ उनके साथ, खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़

निर्भय होकर घोषित करते, जो अपने उदगार विचार
जिनकी जिह्वा पर होता है, उनके अन्तर का अंगार
नहीं जिन्हें, चुप कर सकती है, आतताइयों की शमशीर

मैं हूँ उनके साथ, खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़

नहीं झुका करते जो दुनिया से करने को समझौता
ऊंचे से ऊंचे सपनों को देते रहते जो न्योता
दूर देखती जिनकी पैनी आँखें, भविष्य का तम चीर

मैं हूँ उनके साथ, खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़

जो अपने कन्धों से पर्वत से बढ़ टक्कर लेते हैं
पथ की बाधाओं को जिनके पाँव चुनौती देते हैं
जिनको बाँध नहीं सकती है लोहे की बेड़ी जंजीर

मैं हूँ उनके साथ, खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ

जो चलते हैं अपने छप्पर के ऊपर लूका धर कर
हर जीत का सौदा करते जो प्राणों की बाजी पर
कूद उदधि में नही पलट कर जो फ़िर ताका करते तीर

मैं हूँ उनके साथ, खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़

जिनको यह अवकाश नही है, देखें कब तारे अनुकूल
जिनको यह परवाह नहीं है कब तक भद्र, कब दिक्शूल
जिनके हाथों की चाबुक से चलती है उनकी तकदीर

मैं हूँ उनके साथ, खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़

तुम हो कौन, कहो जो मुझसे सही ग़लत पथ लो तो जान
सोच सोच कर, पूछ पूछ कर बोलो, कब चलता तूफ़ान
सत्पथ वह है, जिसपर अपनी छाती ताने जाते वीर

मैं हूँ उनके साथ, खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़

Why no terror strike in US post 9/11 while we have???

This is the question that every one asks and blame it on police, security and int agencies. True, that we have been attacked umpteen number of times and have some how not able to curb this. But comparing it with situation in US is tad harsh. We are India and not US. Ponder on under mentioned points and you will realize why………..

1. Our politicians are lame duck (fattu aur chutiye) and they don’t have will to curb this menace of terrorism. The vote bank card is played at every single step. Interference with functioning of security agencies further weakens them.

2. US is lucky not to have “good neighbours” like us.

3. US security forces don’t have to man their borders. India has LoC, LAC, IB and porous borders to Nepal and Bangladesh. 70% of our resources are deployed to keep an eye on these boundaries. Thousands km of boundary being manned by few thousand men. The forces are overstretched yet they have been doing very good job. If you have been on borders, you ll realize that no matter how much force you put there will be gaps and thus infiltration.

4. No sync between state and center. Our governments are too busy in playing blame game.

5. India’s demography is very diversified than US and meddling by local gunda to politicians is at every level.

6. We don’t have stringent laws and existing one are toothless.

7. Our leaders lack the will to tackle terrorism. They want to keep it lingering so that it acts as a tool for them in their petty politics.

8. We as people only make complaints and don’t really feel for NATION. I can bet that more than 70% of populace is not interested in what is going in our nation. The attitude of Indifference. When we become victim, we Cry. In US, citizens are more law abiding and patriotic.

9. We are reluctant to participate in Democratic process and then keep on cribbing for remaining time. The day we will have voting% more than 75, automatically good candidates will enter assembly or parliament.

10. We are too soft state. We are wary of bold decisions. In US or Israel, citizens consider themself to be soldier and don’t get bog down by the terrorist demands or acts. They believe in crushing it.

11. We have no value of human life. Its comes far too cheap in our nation. In US they value human life. So, we cry for one day and then forget everything. This is our beauty that we forget things very fast!!!

The day we realize that this nation which we call INDIA is constituted by us. The day we think to be an INDIAN first. The day we feel good for our nation and work towards building better INDIA. The day we decide to act rather than only react or want some one else to act on our behalf. That day we will be able to change the face and fate of our INDIA. Everyone of us must be part of nation building process.

Be the change you want to see.If you are not the part of solution then you are the problem. There is no mid way.

Jai Hind!

10 Pillars of Development

Dr Kalam defined the 10 pillars of development; he said that, if India is determined, these targets can be achieved by the year 2020:

1. A nation where the rural and urban divide has been reduced to a thin line.

2. A nation where there is equitable distribution and adequate access to energy and quality water.

3. A nation where agriculture, industry and service sector work together in symphony.

4. A nation where education is not denied to any meritorious candidate because of societal or economic discrimination.

5. A nation which is the best destination for the most talented scholars, scientists and investors.

6. A nation where the best of healthcare is available to all.

7. A nation where the governance is responsive, transparent and corruption free.

8. A nation where poverty has been totally eradicated, illiteracy removed and crimes against women and children are absent and none in the society feel alienated.

9. A secure nation devoid of terrorism, peaceful land happy; a nation that continues with a sustainable growth path.

10. Finally a nation that is one of the best places to live in and is proud of its leadership.

Source: REDIFF

Qualities of Good Leader

According to Dr Kalam, these are characteristics an ideal leader should have.

1. A leader must have a vision.

2. He must have the passion to transform this vision into action.

3. He must be able to travel into unexplored parts. A good leader, says Dr Kalam, never travels the paths explored by others.

4. A leader must know how to manage success and failure.

5. A leader must have courage to take decisions.

6. A leader should have good management skills.

7. Every action of the leader should be transparent.

8. A leader must work with integrity and succeed with integrity.

Source: REDIFF

Hindi Poem: Ab Hausla Kam nahi Hoga!

This poem is dedicated to all the protesters who have decided to come out on road demanding stringent action against the rapists in Delhi gang rape case. This fight is now more about the government’s and police apathy and seriousness with which crime of rape is dealt with in our country.

हक के लिए फिर शंखनाद होगा
सड़को पर फिर लोगों का हुजूम होगा
कर ले सरकार सारी तैयारी
अब तो फैसला हो कर रहेगा

जा रहा हूँ मैं अपना अधिकार मांगने
चल जाए लाठी या आंसू गैस के गोले
सच के लिए अब हर बलिदान होगा

महामहिम और महामौन, चुप्पी से काम नहीं होगा
देखते हैं कब तक चेहरा छिपा सकते हैं ये सियासतदान
हमारा हौसला अब कम न होगा

इस बार विकल्प कोई और नहीं है
माताओं और बहनों की इज्ज़त से बढ़कर कुछ और नहीं है
खादी और खाकी की साठ-गांठ का
अब असर हम पर नहीं होगा

अबकी उदासीनता दिखी तो
लहू ये और उत्तेजित होगा
सीने की ज्वाला भड़केगी
हिंसा-अहिंसा के पाठ का कोई फायदा नहीं होगा

कर ले सरकार सारी तैयारी
अब तो फैसला हो कर रहेगा

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Hindi Poem: Khud Ko haara mehsoos karta hoon!

न जाने क्यूँ ऐसा प्रतीत होता है
जीवन एक दौड़ के सिवा कुछ भी नहीं है
हर व्यक्ति एक धावक है
वो जीतने के लिए कुछ भी कर सकता है
ये दौड़ है – औरों से आगे निकलने की
पर इस दौड़ को कोई अंत नहीं है
शायद इसी लिए आज हमारे मुख पर कृत्रिम मुस्कान है
आस-पास सब कुछ अनैसर्गिक है
स्वार्थपरता इतनी बढ़ गयी है
की अपने आगे हम किसी को देख ही नहीं पाते
खुद की सम्पन्नता से ज्यादा हमें औरों की असफलता की ख़ुशी है
किसी और का दर्द, दुःख, मजबूरी हमें सताता नहीं है
गैरों की बात क्या, इस दौड़ में अपने पीछे छूट रहे हैं
और हम अंधों की तरह माला के मोती तोड़ते जा रहे हैं
अनुराग और अदब भूल गए हैं
रिश्ते नाते सफलता की सीढ़ी के लिए कुर्बान कर रहे हैं
पैसे कमाने की भूख ने हमें भावशून्य कर दिया है
ये सामाजिक पतन का सूचक है
नैतिकता अब हमारे यहाँ घर करती नहीं
यथार्थ जीवन में स्नेह एवं भावना खो गयी है
एहिक जीवन की चाह में हम तन्हा रह गए हैं
समय के अभाव में सारे बंधन कमज़ोर पड़ रहे हैं
इतना खोने की बाद भी हमें कहाँ जाना है इसका इल्म नहीं है
पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो सोचता हूँ
इतना पाने के बाद भी जीवन नीरस है
इस आप-धापी में कागज़ के टुकड़े तो बहुत जुटाए
तमन्ना थी सच्ची ख़ुशी पाने की पर वो कहीं रूठ गयी
अब तो बस अकेलापन और उदासीनता मन में बसर करती है
भटक गया हूँ सांसारिक सुख को ग्रहण करने की लालसा में
मैं शतरंज की बिसात का वो राजा हूँ जो अपनों को खो चुका है
अपना दायित्व और कर्तव्य न निभा पाने का दर्द
अब शूल की तरह कलेजे को भेदता है
चाह कर भी अब हालात बदल नहीं सकता हूँ
व्यर्थ के लौकिक आनंद में अनासक्त हो गया हूँ
इतना पाने के बावजूद इस दौड़ में खुद को हारा महसूस करता हूँ
खुद को हारा महसूस करता हूँ….. खुद को हारा महसूस करता हूँ…..

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Motivational Hindi Poem: Kiya tha Agaaz hausle ke saath!

किया था आगाज़ हौसले के साथ
हर चुनौती को देते गए तुम जवाब
मंजिल का लम्बा सफ़र
रास्तो के पत्थर को पार करते हुए
आज इतने करीब पहुँच कर
तू थक नहीं सकता
बहुत पड़े हैं थपेड़े किन्तु
संकल्प शिथिल नहीं पड़ सकता
पुनः विजय निश्चय करना है
किया था आगाज़ हौसले के साथ
अंजाम को आगाज़ से भी भव्य करना है!!

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Inspiration and Motivation: जो देश को उन्नत बना सके सिर्फ वही देशभक्त चाहिए!

आवाज़  जो  हमारी  सरकार  को  सुने  नहीं  देती
राष्ट्र  की  पीड़  दिखाई  नहीं  देती
ये  कैसा  समय  आ  गया  गाँधी  के  देश  में
अहिंसा  से  अपनी  बात  रखने  वालों  की  पुकार
सिंघासन  पर  काबिज  जन  प्रतिनिधि  को  श्रवण  नहीं  करती
इससे  बड़ा  कलंक  लोकतंत्र  पर  क्या  होगा
जहाँ  तानाशाही  इस  कद्र  बढ़  गयी  है
जो  जनता  को  उपेक्षित  है  कर  देती
बीते  वर्ष  में  हमारी  सरकार  ने  हर  बार  यही  सन्देश  दिया
कुछ  भी  हो  जाए  हम तुम्हे  नहीं  सुनेंगे  भैया
अपनी  ताक़त  दिखानी  हो  तो  राजनीती  में  मुकाबला  करो
और  अपना  रास्ता  खुद  तय  करो
प्रजातंत्र  में  अब  शांति-आन्दोलन की  जगह  नहीं
दुर्भाग्य  है  इस  मुल्क  का
जहाँ  जन  सेवा  के  नाम  पर  सिर्फ  मेवा  खाया  जा  रहा  है
खुदगर्जी  में  सराबोर  अपना  बैंक  बैलेंस  बढाया  जा  रहा  है
लोकतंत्र पर ये अघात नहीं सहा जाएगा
अब तो सबक सिखाया जाएगा
छोड़  गाँधी  की  लाठी  अब  आज़ाद  की  पिस्तोल  बोलेगी
जरूरत  पड़ी  तो  संसद  में, सड़कों  पर  लड़ा  जाएगा
क्या  करें  देश  वालों  मजबूरी  है, क्यूंकि
शांति-आन्दोलन  हमारी  सरकार  को  दिखाई  नहीं  देता
और  तब  अगर  बुद्धजीवियों  ने  प्रवचन  दिया
तब  उनको  भी  लताड़ा  जाएगा
आज  कायदा  कानून  तरीके  से  परे  हो  कर
लोग  परिणाम  की  चिंता  करते  हैं
मिटटी  ये  उद्घोष  करती  है
स्वंतंत्रता  के  ६६वी   वर्षगाँठ  पर
उठो  देश  के  लाल  और  बचा  लो  अपनी  माँ  को
जिसे  उसके  ही  कुछ  सपूत  लूट  रहे  हैं
अब  गाँधी  नहीं  सुभाष  चाहिए, देशद्रोहियों का संघार चाहिए
जो  देश  को  उन्नत  बना  सके  सिर्फ वही देशभक्त  चाहिए!
इस  स्वाधीनता  दिवस  ये  संकल्प  करें
न्योछावर  कर  देंगे  खुद  को  वतन  पर  गर  आवश्यकता  पड़ी
राष्ट्र  धर्म  से  बढ़  कर  न  ही  राज  धर्म न ही गठबंधन धर्मं  है  और  न  ही कोई  और!!
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London 2012: The Most Successful for India!

Disappointed on Sushil winning Silver.

Sushil will be first Indian to win two individual Olympic medals. Well Done. You are Legend for us!

But perhaps this has been the beauty of London 2012. For the first time we have been disappointed of not winning PARTICULAR medal otherwise every time we use to hope to win A medal. London 2012 is India’s most successful campaign and it will be the new start for Indian Sports. Perhaps we are on the verge of breaking cusp/ jinx of being medal deprived nation and rise from here on.
We won three at Beijing and now Six in London, this tally is hopefully going to increase with every game. All the best for sporting bodies across country to focus in right direction. First time we have been so competitive in Int’l stage. Winning medals is different and getting recognized on Int’l stage is in itself a big achievement.
Eg: Devendro, Vikas Gowda, Tintu Loka, Kashyap, Ponappa/ Gutta, Swaran Singh, BB Rana, Amit Kumar, Jai Bhagwan, Sangwan and many more have left a mark on Sporting Fraternity around the world. They will surely take respective sports to new glory.

Come on India!! Time to celebrate the most successful Olympics. Cheers!!!

Hindi Story: Aakhir Kiske Liye?

न समझो तो मिट जाओगे ऐ हिंदुस्तान वालों
तुम्हारी दास्ताँ तक न होगी दास्तानों में!!


एक सैनिक के लिए देश पर कुर्बान हो जाने से बढ़कर गौरव नहीं होता है! हर सैनीक के दिल का यही जज्बा ने हमारी स्वतंत्रता को बरक़रार रखा है! अगर हमारे सैनीक अपने कर्त्तव्य से पीछे हट जाएँ तो हमारे देश को गुलामी की जंजीरों में फ़ीर से जकड़ने में ज्यादा समय नहीं लगेगा! देश के एक सैनीक और देशवासियों में एक अनकहा करार होता है जिसके अंतर्गत सैनीक को यह भरोसा होता है की अगर अपने देश की अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा करते हुए उसके प्राण भी जाते हैं तो देश के जनता, देश की सर्कार उसके परिवार का भली भाँती ख्याल रखेगे! एक सैनीक इसी विश्वास के साथ रण भूमि में उतरता है और अपने कर्त्तव्य को पूर्ण करता है, परन्तु क्या हमने अपने उस करार को निभाया है?
मुझे ऐसे लगता है की एकाध लोगों को छोड़ दिया जाए तो शेष लोगों को इससे कोई लेना देना नहीं होता की एक शहीद का परिवार किन परिस्थितियों से गुजरता है!
मेरे बेटे को आज गुजरे हुए ढाई साल हो गए हैं! वह भारतीय सेना में जवान था और सरहद पर  आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में वह शहीद हो गया! दो वर्ष पूर्व स्वाधीनता दिवस के दिनों उसे महावीर चक्र से नवाजा था! पर मैं आज भी मेरे दील को विश्वास नहीं होता की मेरा नवीन अब कभी मुझे पापा कहकर नहीं बुलाएगा! उसके शहीद होने की जब खबर मिली तो ऐसे लगा की पल ठहर सा गया हो, जीवन में उथल पुथल मच गयी और एक जवान बेटे के लिए जो अरमान थे वो एक ही पल में बिखर गए! नवीन की माँ उस दिन से बिलकुल चुप हो गयी है!
नवीन की शवयात्रा में लाखों का जुलूस सड़क पर उतर आया था और बड़े बड़े राजनेताओं ने भी अपने “कर कमलों” द्वारा “पुष्प चक्र” चढा कर श्रद्धांजलि दी थी! सरकार ने भी मुआवजे का एलान कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी!
ज़िन्दगी की यह भी एक सच्चाई है की ज़िन्दगी कभी झुकती नहीं, साँसे रुकती हैं पर ज़िन्दगी कभी रुकती नहीं! ज़िन्दगी को दुबारा चलाने के लिए सरकारी मुआवजे के लिए एक दफ्तर से दुसरे दफ्टर का चक्कर काट रहा हूँ, पर कीसी के कानों पर एक पिता की फरियाद नहीं पड़ रही है! सरकारी बाबू को ज़मीन आवंटित करने के लिए अपना हिस्सा चाहिए! उसका कहना है की “तुम्हारे बेटे ने देश के लिए जान दे दी तो उससे मुझे क्या करना! जब तक मेरा लाभ नहीं होगा तब तक…..!” उसके इस कथन ने अन्दर से झकझोर कर रख दिया! ऐसे प्रतीत होता है की लोग एक शहीद के परिवार की तरफ जो हमदर्दी रखते हैं वो एक छल है! दो साल पहले पूरे गाँव ने वीर सपूत का गुण गान किया पर आज चौराहे पर लगी उसकी प्रतिमा भी लोगों को उसकी कुर्बानी याद नहीं दिलाती! आज उसके परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं है! हुक्मरानों ने नवीन की शहादत पर भी राजनीती की और अपनी झोलियाँ भरी!
आज मेरी सहनशीलता जवाब दे चुकी है और रह रह कर यही सवाल जेहन में आता है की क्यों मेरे बेटे ने उस अनजान व्यक्ति के लिए अपने प्राण दे दिए जो उसकी क़द्र नहीं करता है! आज के युग जब इंसान सिर्फ स्वार्थ में जीता है तो क्यूँ नहीं मेरे बेटे ने अपने घरवालों के बारे में, अपनी जिम्मेदारियों के बारे में और अपने बारे में सोचा? आखिर किसके लिए मेरे बेटे ने शहादत दी? उन लोगों के लिए जो आज उसे भूल चुके है, या उन सरकारी मंत्रियों के लिए जिनकी नकारता की कीमत मेरे बेटे ने चुकाई है? “वीरों की भाँती मृत्यु” जैसा कलाम इस संसार में नहीं होता है! जीवन और मृत्यु ही सच्चाई है! आज जब पूरा देश पंद्रह अगस्त की तैयारी कर रहा है तो बस मैं उनसे एक ही सवाल करना चाहता हूँ की आखिर किसके लिए?

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