जल  रहा  गरीब  है

दृश्य  ये  अजीब  है

जल  रहा  गरीब  है

लपट यह  मेहेंगाई  की

सभी  को  कर  रही  हालाक  है

दो  जून  की  रोटी  भी  अब  तो  यहाँ  दुश्वार  है

देख  बेपरवाही  हमारी  सरकार की

कितना  बड़ा  ये  मज़ाक  है

कहाँ  है  वो  आर्थिक  दर

जिस  पर  सब  को  नाज़  है

चमक  रहा  है  भारत

सबका  यह  विचार  है

दो  जून  की  रोटी  भी  अब  तो  यहाँ  दुश्वार  है

देख  बेपरवाही  हमारी  सरकार  की

कितना  बड़ा  ये  मज़ाक  है

नहीं  दूर  हुई  गरीबी  तो

सरकार  की  ये  दरकार  है

३२  रुपैये  गरीब  की

एक  नयी  पहचान  है

देख  बेपरवाही  हमारी  सरकार  की

कितना  बड़ा  ये  मज़ाक  है

दृश्य  ये  अजीब  है

जल  रहा  गरीब  है