Hindi Poem on Rains: Aaya Sawan Khushiyan Le Kar!
Poems June 6th, 2011आया सावन खुशियाँ लेकर
खुश हुई कुदरत बूँदें प् कर
फ़ैल गयी चारों ओर हरियाली
खिल गए फूल डाली डाली
पायल चनका रही पावस रानी
चालक गया नदियों से पानी
चहचहा रहे हैं पंची दूर गगन में
नाच रहा है मो़र अपने पंख ताने
बुझ गयी पृथ्वी की तृष्णा
सानंद हुआ कृषक अपना
सोंधी सोंधी उठी सुगंधी
बह रही है पवन ठंडी ठंडी
दौड़ उठी कागज़ की कश्ती
बहने मेंहदी रचा आनंद झूलों का लेती
आ गया पर्वों का मौसम
राखी तीज जन्माष्टमी और ओणम
बरखा ने शीतल किया मन्
प्रसन्न हुआ जन जन!
July 16th, 2011 at 2:56 pm
अति सुंदर शब्द !!! मानस पटल को आनंदित तथा ठंडी पवन फुआरों से सराबोर करने वाली पंक्तियाँ !
हार्दिक धन्यवाद !
January 9th, 2012 at 10:19 pm
Excellent poem. Please go ahead with this type of poem further too.
February 2nd, 2012 at 7:53 pm
udiotic