जज़्बा!

जज़्बा……

आसमान छूने का

खुद को आज़माने का

मुश्किलों में हौसला क़ायम रखने का

रुकावटों को रौंदते जाने का

अंधेरों में शमा जलाने का

मेहनत से आगे बढ़ते जाने का

कुछ कर के दिखाने का

अपने अरमानों को कामिल करने का

ऐ जज़्बा-ऐ-दिल गर मैं चाहूं
तो हर मंजिल मुयस्सर हो जाए!!

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