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Dard-E-Dil

1.     आज उसके लिखे कागज़ के टुकड़ो को राख कर दिया
मेज पर रखी उसकी तस्वीर को भी अपने से दूर कर दिया
मिटा दूंगा हर चीज़ जो उसकी याद दिलाती है
पर समझ नहीं आता कैसे मिटा दूं वो यादें
जो मेरे दिल में आज भी बसर करती हैं
दर्द-ऐ-दिल बयां नहीं होता है
चाहूं न चाहूं मेरी नज़रें आज भी उसका इंतज़ार करती हैं
नहीं मानता की वो तो अब ओझल हो गयी है
दिल को उम्मीद है की वो सब कुछ छोड़ मेरे पास आ जाएगी!!

2.     मझधार से निकाल कर जिसे पार ले कर आया
उसे खुद पर यकीन करना सिखाया
उसकी सोच को नयी दिशा दी
साथ उसका कितना हसीन था
सोचा था वो हमेशा मेरे साथ रहेगा
क्या पता था कि वो ही हमें मझधार में छोड़ चलेगा
मझधार से निकाल कर जिसे पार ले कर आया
आज उसी ने कर दिया मुझको पराया!

3.     कहना तो बहुत कुछ चाहता थे तुझसे
पर मेरे दिल ने रोक लिया
जानता है कि तुझे रुला कर
ये भी बेचैन हो जाएगा!

4.     आज भी तेरी तस्वीर दिल में बसाए तेरा दीदार करते हैं
तेरे हाथों की मेहँदी की खुशबू  मेरे घर को गुलज़ार करती हैं
तुम मुझे छोड़ कर चली गयी, फिर भी
मेरी ज़िन्दगी तो अभी भी तेरा ही नाम लिया करती है!!

5.     तुमको बेइंतेहा चाहा हमने
तेरी मोहब्बत आदत बन गयी
तेरे जाने के बाद पसरी तन्हाई कहती है
भूल जाऊं तुमको, पर कैसे
आदतें बदलती हैं कहाँ आसानी से…

6.     दिल ने जिसे हमेशा अपना समझा
आज वो किसी और का होने जा रहा है
क्यूँ होता है ये मोहब्बत में
जिसे चाह बेपन्हा आज वो गैर का घर बसाने जा रहा है!!

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