Tag Archives: Hindi Poem

Hindi Poem: नज़रें तो तुम्हारी झुकती हैं!

तुम  खुश  हो  मेरी  आँखों  को  आंसू  दे  कर
दामन  किसी  और  का  थाम  कर
हम  खुश  है  तुम्हारी  असलियत  देख  कर
किये  थे  जो  तुमने  हमसे  वादे  कभी
आज  वो  वादे  किसी  और  से  करता  देख  कर
कैसे  बदलती  है  नियत  लौंडिया  की
जीवन  के  इस  अनुभव  को  देख  कर
पर  जिंदगी  वो  प्रेम  गीत  नहीं
बर्बाद  कर  दी  जाए  तुझ  जैसी  पर
हम  तो  आज  भी  चलते  हैं  उसी  टशन  से
नज़रें  तो  तुम्हारी  झुकती  हैं  हमारी  एक  आहट  पर
शर्मसार  हो  जाती  हो  मेरे  एक  ख्याल  पर!

तुम  खुश  हो  मेरी  आँखों  को  आंसू  दे  कर

दामन  किसी  और  का  थाम  कर

हम  खुश  है  तुम्हारी  असलियत  देख  कर

किये  थे  जो  तुमने  हमसे  वादे  कभी

आज  वो  वादे  किसी  और  से  करता  देख  कर

कैसे  बदलती  है  नियत  लड़की   की

जीवन  के  इस  अनुभव  को  देख  कर

पर  जिंदगी  वो  प्रेम  गीत  नहीं

बर्बाद  कर  दी  जाए  तुझ  जैसी  पर

हम  तो  आज  भी  चलते  हैं  उसी  टशन  से

नज़रें  तो  तुम्हारी  झुकती  हैं  हमारी  एक  आहट  पर

शर्मसार  हो  जाती  हो  मेरे  एक  ख्याल  पर!

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Hindi Poem: क्यूँ कोख से ऐसा रावण पाया?

ज़माने  के  अंदाज़  बदले
उसके  साथ  समाज  बदले
चाह  था  न  बदले  पुरुषार्थ  के  मायने
पर  समय  के  साथ  वो  भी  बदले
एक  आदमी  के  लिए  वीरता  के  अर्थ  बदले
मजलूम  को  हवस  का  शिकार  बनाया
तेजाब  फेंक  उसकी  ख़ूबसूरती  को  बिगाड़ा
पूरे  शहर  में  नग्न  घुमाया
दहेज़  के  लिए  जिंदा  जलाया
इन  कुकर्मो  ने  नर  जाती  को  कलंकित  किया
गौरव  नहीं  किन्तु  शीश  झुकाया
कायरता  की  पताका  फेहराया
देख  नैतिक  पतन  अपने  तनय  की
हर  जननी  का  दिल  कराहा
क्यूँ  कोख  से  ऐसा  रावण पाया!!
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