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Hindi Poem: तेरे बिन ज़िन्दगी अधूरी है !!

आज दिल बेकरार है
सिर्फ तेरा ही ख्याल है
एक बार फिर उमड़ पड़ा
तेरे लिए मेरे प्यार का सैलाब है!!


याद आता है तेरे संग बिताये हसीन पल
कर देता है मेरा मन प्रफुल
तेरे लबों कि वो मिठास
बाँहों में तेरे सुकून का एहसास!!


जीवन में आई है बहार
तेरे आने से
अब तो यही दुआ है रब से
बन जाओ तुम मेरी, बस मेरी
नहीं कोई परवाह इस ज़माने से!!


लगता है हर लम्हा अब तेरे बिन भारी है
आँखों में बसी सिर्फ तेरी सूरत प्यारी है
मिट जाए अब जो ये दूरी है
तेरे बिन मेरी ज़िन्दगी अधूरी है!!!

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Hindi Poem: Ab Hausla Kam nahi Hoga!

This poem is dedicated to all the protesters who have decided to come out on road demanding stringent action against the rapists in Delhi gang rape case. This fight is now more about the government’s and police apathy and seriousness with which crime of rape is dealt with in our country.

हक के लिए फिर शंखनाद होगा
सड़को पर फिर लोगों का हुजूम होगा
कर ले सरकार सारी तैयारी
अब तो फैसला हो कर रहेगा

जा रहा हूँ मैं अपना अधिकार मांगने
चल जाए लाठी या आंसू गैस के गोले
सच के लिए अब हर बलिदान होगा

महामहिम और महामौन, चुप्पी से काम नहीं होगा
देखते हैं कब तक चेहरा छिपा सकते हैं ये सियासतदान
हमारा हौसला अब कम न होगा

इस बार विकल्प कोई और नहीं है
माताओं और बहनों की इज्ज़त से बढ़कर कुछ और नहीं है
खादी और खाकी की साठ-गांठ का
अब असर हम पर नहीं होगा

अबकी उदासीनता दिखी तो
लहू ये और उत्तेजित होगा
सीने की ज्वाला भड़केगी
हिंसा-अहिंसा के पाठ का कोई फायदा नहीं होगा

कर ले सरकार सारी तैयारी
अब तो फैसला हो कर रहेगा

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Hindi Poem: Kyun Ishq ne Dard Diya!

कल  यूही  बातो  बात  में  चैम्प से  discussion हुआ .
क्यों  इश्क  ने  लौंडे  को  ही  दर्द  दिया
पन्ने  पलट  के  भी  देखा, बेवफा  वही थी
गीत  में, कविता  में,  ग़ज़ल  में  बेवफा  वही  थी
वो  तो  भटकता  ही  रहा,  कहानी  हर  बार  की  यही  थी
लौडिया  की  बेवफाई  ने  बहुतो को रुलाया
हम  तो  गम  में  पूरी  तरह  डूबे  भी  नहीं थे
और  उसकी  शादी  का निमंत्रण पत्र  आया

अश्को  की  माला  लौंडे  को  पहनाते  हुए
हंस  कर  घर  किसी  और  के  साथ  बसाया
लौंडिया  बहुत  कमीनी  होती  है
प्यार  की  कसमे  तो  एक  के  साथ  खाती  है
साथ  ही  साथ  back up plan बनाती  है
जूनून  से  लौंडा  ही  मोहब्बत  करता  है
लेकिन  अब ये  हो  नहीं  सकता  कह  कर
लौंडे  को  केला  दे  कर  निकल  जाती  है
Champ ने  शोध  को  आगे  बढाया  तो  नतीजे  में  ये  पाया
लौंडिया  को  पता  है  एक  गया  तो  दूजा आया
liquid ने  प्यार  के  पंचनामा  में  भी  यही  बताया
लौंडिया  ने  तो  सिर्फ  अपना  timepass किया  और  अपनी  market value को  बढाया
चूतिया  तो  वो  लौंडा  था  जो  सच्चाई  भांप  न  पाया
बात  जब  करनी  चाहे  उससे  तो  उसका  नया नया fiance बीच  में  आया
इश्क  के  चक्कर  में  अपना  सब  कुछ  लुटा  आया
पारो सदा  रही  महलों  में  और  देवदास  ने  सड़क  पर  जान गंवाया

एक लौंडिया के लिए तो यही बात सच है
Men are a luxury, not a necessity!!
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Dard-E-Dil

1.     आज उसके लिखे कागज़ के टुकड़ो को राख कर दिया
मेज पर रखी उसकी तस्वीर को भी अपने से दूर कर दिया
मिटा दूंगा हर चीज़ जो उसकी याद दिलाती है
पर समझ नहीं आता कैसे मिटा दूं वो यादें
जो मेरे दिल में आज भी बसर करती हैं
दर्द-ऐ-दिल बयां नहीं होता है
चाहूं न चाहूं मेरी नज़रें आज भी उसका इंतज़ार करती हैं
नहीं मानता की वो तो अब ओझल हो गयी है
दिल को उम्मीद है की वो सब कुछ छोड़ मेरे पास आ जाएगी!!

2.     मझधार से निकाल कर जिसे पार ले कर आया
उसे खुद पर यकीन करना सिखाया
उसकी सोच को नयी दिशा दी
साथ उसका कितना हसीन था
सोचा था वो हमेशा मेरे साथ रहेगा
क्या पता था कि वो ही हमें मझधार में छोड़ चलेगा
मझधार से निकाल कर जिसे पार ले कर आया
आज उसी ने कर दिया मुझको पराया!

3.     कहना तो बहुत कुछ चाहता थे तुझसे
पर मेरे दिल ने रोक लिया
जानता है कि तुझे रुला कर
ये भी बेचैन हो जाएगा!

4.     आज भी तेरी तस्वीर दिल में बसाए तेरा दीदार करते हैं
तेरे हाथों की मेहँदी की खुशबू  मेरे घर को गुलज़ार करती हैं
तुम मुझे छोड़ कर चली गयी, फिर भी
मेरी ज़िन्दगी तो अभी भी तेरा ही नाम लिया करती है!!

5.     तुमको बेइंतेहा चाहा हमने
तेरी मोहब्बत आदत बन गयी
तेरे जाने के बाद पसरी तन्हाई कहती है
भूल जाऊं तुमको, पर कैसे
आदतें बदलती हैं कहाँ आसानी से…

6.     दिल ने जिसे हमेशा अपना समझा
आज वो किसी और का होने जा रहा है
क्यूँ होता है ये मोहब्बत में
जिसे चाह बेपन्हा आज वो गैर का घर बसाने जा रहा है!!

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Hindi Poem: Jabse Tum Jeevan Mein Aa Gayi!

जीवन के २३ बसंत वीराने में गुजरने के बाद
अचानक से आ गयी बहार
जब से तुम मेरे जीवन में आ गयी

दिल में उथल-पुथल मच गयी
हर पल सिर्फ तुम्हारा ख्याल
था एक गज़ब का एहसास
तेरी चाहत रातों कि नींदे चुरा ले गयी
जब से तुम मेरे जीवन में आ गयी
तेरे साथ समय बीतता गया
मैं तेरा दीवाना बनता चला गया
अपनी किस्मत कहूं या रब का करम
कि मेरी तुमसे मुलाक़ात हो गयी
जब से तुम मेरे जीवन में आ गयी
जैसे जैसे सूरज चढ़ता गया
तेरे लिए प्यार और भी गहरा होता गया
शुरूआती पसंद मुहब्बत में तब्दील हो गयी
और ये मुहब्बत मीठा मर्ज़ दे गयी
जब से तुम जीवन में आ गयी
तेरे संग जो सपने संजोये हैं
उसे हकीकत करना है
मेरे जीवन में खुशियों के रंग बरसा गयी
जब से तुम मेरे जीवन में आ गयी!!!

This poem is for especial person on occasion of her birthday on 01-10-12 :)

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Hindi Poem: Khud Ko haara mehsoos karta hoon!

न जाने क्यूँ ऐसा प्रतीत होता है
जीवन एक दौड़ के सिवा कुछ भी नहीं है
हर व्यक्ति एक धावक है
वो जीतने के लिए कुछ भी कर सकता है
ये दौड़ है – औरों से आगे निकलने की
पर इस दौड़ को कोई अंत नहीं है
शायद इसी लिए आज हमारे मुख पर कृत्रिम मुस्कान है
आस-पास सब कुछ अनैसर्गिक है
स्वार्थपरता इतनी बढ़ गयी है
की अपने आगे हम किसी को देख ही नहीं पाते
खुद की सम्पन्नता से ज्यादा हमें औरों की असफलता की ख़ुशी है
किसी और का दर्द, दुःख, मजबूरी हमें सताता नहीं है
गैरों की बात क्या, इस दौड़ में अपने पीछे छूट रहे हैं
और हम अंधों की तरह माला के मोती तोड़ते जा रहे हैं
अनुराग और अदब भूल गए हैं
रिश्ते नाते सफलता की सीढ़ी के लिए कुर्बान कर रहे हैं
पैसे कमाने की भूख ने हमें भावशून्य कर दिया है
ये सामाजिक पतन का सूचक है
नैतिकता अब हमारे यहाँ घर करती नहीं
यथार्थ जीवन में स्नेह एवं भावना खो गयी है
एहिक जीवन की चाह में हम तन्हा रह गए हैं
समय के अभाव में सारे बंधन कमज़ोर पड़ रहे हैं
इतना खोने की बाद भी हमें कहाँ जाना है इसका इल्म नहीं है
पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो सोचता हूँ
इतना पाने के बाद भी जीवन नीरस है
इस आप-धापी में कागज़ के टुकड़े तो बहुत जुटाए
तमन्ना थी सच्ची ख़ुशी पाने की पर वो कहीं रूठ गयी
अब तो बस अकेलापन और उदासीनता मन में बसर करती है
भटक गया हूँ सांसारिक सुख को ग्रहण करने की लालसा में
मैं शतरंज की बिसात का वो राजा हूँ जो अपनों को खो चुका है
अपना दायित्व और कर्तव्य न निभा पाने का दर्द
अब शूल की तरह कलेजे को भेदता है
चाह कर भी अब हालात बदल नहीं सकता हूँ
व्यर्थ के लौकिक आनंद में अनासक्त हो गया हूँ
इतना पाने के बावजूद इस दौड़ में खुद को हारा महसूस करता हूँ
खुद को हारा महसूस करता हूँ….. खुद को हारा महसूस करता हूँ…..

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Motivational Hindi Poem: Kiya tha Agaaz hausle ke saath!

किया था आगाज़ हौसले के साथ
हर चुनौती को देते गए तुम जवाब
मंजिल का लम्बा सफ़र
रास्तो के पत्थर को पार करते हुए
आज इतने करीब पहुँच कर
तू थक नहीं सकता
बहुत पड़े हैं थपेड़े किन्तु
संकल्प शिथिल नहीं पड़ सकता
पुनः विजय निश्चय करना है
किया था आगाज़ हौसले के साथ
अंजाम को आगाज़ से भी भव्य करना है!!

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Hindi Poem: Desh Bech Khayenge!

walmart-tesco-carrefour-indiaभारत  नीलामी  का  इरादा  जबसे  पक्का किया  है
महामौन सिंह  के  मुख  से  अलफ़ाज़  निकलने  लगे  हैं
Walmart Carrefour Tesco के  भारत  प्रवेश  के  लिए  कुछ  भी  कर  जायेंगे
ज़रुरत  पड़ी  तो  भारत  बेच  खायेंगे
हमने  लूटा  तो  बहुत  पर  भूख अभी बाकी है
कोयले  की  खदानों  से  निकला  धन  अभी  नाकाफी  है
अब  तो  reforms के  नाम  पर  चपत  लगायेंगे
विदेशी  कम्पनियों  से  dollar  में  कमाएंगे
जहन्नुम  में  जाए  देश  हम  तो  अमेरिका  का  पकड़  कर  हिलाएंगे
लोग  एक  दो  महीने  सड़क  पर  मोर्चा  निकालेंगे  फिर  adjust हो  जायेंगे
हर  बार  की  तरह  इस  बार  भी  कुछ  नहीं  होगा
यही  सोचकर  सभी  अपने  घर  में  दुबक  कर  रह  जायेंगे
मीडिया  वाले  वाद -विवाद  प्रतियोगिता  करवा  कर  TRP बढ़ाएंगे
लेकिन समाधान नहीं बता पायेंगे
और  इंडिया  की  हालत  को  गाली  देते हुए  चुप-चाप  रह  जायेंगे
पर  अपनी  comfort zone से  बहार  हम  कभी  नहीं  आयेंगे
जिनको  अभी  भी  फर्क  नहीं  पड़ता  वो  क्या  घंटा  देश  बनायेंगे
चलिए  अब  बहुत  वक़्त  ज़ाया  हो  गया  अब  अमेरिका  में  ही  स्वतंत्रता  दिवस  मनाएंगे!!

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Inspiration and Motivation: जो देश को उन्नत बना सके सिर्फ वही देशभक्त चाहिए!

आवाज़  जो  हमारी  सरकार  को  सुने  नहीं  देती
राष्ट्र  की  पीड़  दिखाई  नहीं  देती
ये  कैसा  समय  आ  गया  गाँधी  के  देश  में
अहिंसा  से  अपनी  बात  रखने  वालों  की  पुकार
सिंघासन  पर  काबिज  जन  प्रतिनिधि  को  श्रवण  नहीं  करती
इससे  बड़ा  कलंक  लोकतंत्र  पर  क्या  होगा
जहाँ  तानाशाही  इस  कद्र  बढ़  गयी  है
जो  जनता  को  उपेक्षित  है  कर  देती
बीते  वर्ष  में  हमारी  सरकार  ने  हर  बार  यही  सन्देश  दिया
कुछ  भी  हो  जाए  हम तुम्हे  नहीं  सुनेंगे  भैया
अपनी  ताक़त  दिखानी  हो  तो  राजनीती  में  मुकाबला  करो
और  अपना  रास्ता  खुद  तय  करो
प्रजातंत्र  में  अब  शांति-आन्दोलन की  जगह  नहीं
दुर्भाग्य  है  इस  मुल्क  का
जहाँ  जन  सेवा  के  नाम  पर  सिर्फ  मेवा  खाया  जा  रहा  है
खुदगर्जी  में  सराबोर  अपना  बैंक  बैलेंस  बढाया  जा  रहा  है
लोकतंत्र पर ये अघात नहीं सहा जाएगा
अब तो सबक सिखाया जाएगा
छोड़  गाँधी  की  लाठी  अब  आज़ाद  की  पिस्तोल  बोलेगी
जरूरत  पड़ी  तो  संसद  में, सड़कों  पर  लड़ा  जाएगा
क्या  करें  देश  वालों  मजबूरी  है, क्यूंकि
शांति-आन्दोलन  हमारी  सरकार  को  दिखाई  नहीं  देता
और  तब  अगर  बुद्धजीवियों  ने  प्रवचन  दिया
तब  उनको  भी  लताड़ा  जाएगा
आज  कायदा  कानून  तरीके  से  परे  हो  कर
लोग  परिणाम  की  चिंता  करते  हैं
मिटटी  ये  उद्घोष  करती  है
स्वंतंत्रता  के  ६६वी   वर्षगाँठ  पर
उठो  देश  के  लाल  और  बचा  लो  अपनी  माँ  को
जिसे  उसके  ही  कुछ  सपूत  लूट  रहे  हैं
अब  गाँधी  नहीं  सुभाष  चाहिए, देशद्रोहियों का संघार चाहिए
जो  देश  को  उन्नत  बना  सके  सिर्फ वही देशभक्त  चाहिए!
इस  स्वाधीनता  दिवस  ये  संकल्प  करें
न्योछावर  कर  देंगे  खुद  को  वतन  पर  गर  आवश्यकता  पड़ी
राष्ट्र  धर्म  से  बढ़  कर  न  ही  राज  धर्म न ही गठबंधन धर्मं  है  और  न  ही कोई  और!!
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