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Hindi Poem: Ab Hausla Kam nahi Hoga!

This poem is dedicated to all the protesters who have decided to come out on road demanding stringent action against the rapists in Delhi gang rape case. This fight is now more about the government’s and police apathy and seriousness with which crime of rape is dealt with in our country.

हक के लिए फिर शंखनाद होगा
सड़को पर फिर लोगों का हुजूम होगा
कर ले सरकार सारी तैयारी
अब तो फैसला हो कर रहेगा

जा रहा हूँ मैं अपना अधिकार मांगने
चल जाए लाठी या आंसू गैस के गोले
सच के लिए अब हर बलिदान होगा

महामहिम और महामौन, चुप्पी से काम नहीं होगा
देखते हैं कब तक चेहरा छिपा सकते हैं ये सियासतदान
हमारा हौसला अब कम न होगा

इस बार विकल्प कोई और नहीं है
माताओं और बहनों की इज्ज़त से बढ़कर कुछ और नहीं है
खादी और खाकी की साठ-गांठ का
अब असर हम पर नहीं होगा

अबकी उदासीनता दिखी तो
लहू ये और उत्तेजित होगा
सीने की ज्वाला भड़केगी
हिंसा-अहिंसा के पाठ का कोई फायदा नहीं होगा

कर ले सरकार सारी तैयारी
अब तो फैसला हो कर रहेगा

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Hindi Poem: क्यूँ कोख से ऐसा रावण पाया?

ज़माने  के  अंदाज़  बदले
उसके  साथ  समाज  बदले
चाह  था  न  बदले  पुरुषार्थ  के  मायने
पर  समय  के  साथ  वो  भी  बदले
एक  आदमी  के  लिए  वीरता  के  अर्थ  बदले
मजलूम  को  हवस  का  शिकार  बनाया
तेजाब  फेंक  उसकी  ख़ूबसूरती  को  बिगाड़ा
पूरे  शहर  में  नग्न  घुमाया
दहेज़  के  लिए  जिंदा  जलाया
इन  कुकर्मो  ने  नर  जाती  को  कलंकित  किया
गौरव  नहीं  किन्तु  शीश  झुकाया
कायरता  की  पताका  फेहराया
देख  नैतिक  पतन  अपने  तनय  की
हर  जननी  का  दिल  कराहा
क्यूँ  कोख  से  ऐसा  रावण पाया!!
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