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Short Hindi Story: समाज में बच्चे!

गाँव में जब पिछले वर्ष बाढ़ ने तबाही मचाई तो उसमे भजनलाल का घर भी डूब गया! उसकी बीवी चल बसी और अभी कुछ दिनों पूर्व वह भी हैजे की भेंट चढ़ गया! भजनलाल मजदूरी कर के अपना घर चलता था पर अब उसके जाने के बाद उसके दोनों बेटे सड़क पर आ गए हैं और भीख मांगने पर विवश हैं! बडकू १२ साल का है जबकि छोटू तो अभी सिर्फ ५ साल का है! गाँव से भीख मांगते मांगते आज शहर के रेलवे स्टेशन पर आ पहुंचे हैं! पिछले ३-४ महीनों में उनका गुजरा लोगों की दया से हुआ है और आज उनकी कैफियत बहुत ही बेचारी हो चली है! बडकू तो समझदार है पर छोटू के लिए ज़िन्दगी की यह ज़ंग समझ से परे है! हर पल सिर्फ अम्मा और बाप्पा के बारे में पूछता रहता है!
स्तातीओं पर एक दिनों उनकी मुलाक़ात हीरो से हुई! हीरो एक अनाथ बालक है जो रेलवे स्टेशन पर ही पला और बड़ा हुआ है! वह अपने ही जैसे कुछ लड़के-लड़कियों के साथ स्टेशन पर रहता है! इन सब बच्चों का मालिक है रंगा! जब यह बच्चे रंगा के पास आये थे तब बिलकुल मासूम थे पर आज इनमे से अधिकतर ज़िन्दगी की कठिन राह पर छ्हलना सीख चुके हैं पर जिस राह पर वोह चल रहे हैं वह सही है या गलत, ये उन्हें समझाने वाला कोई नहीं है! यह बच्चे स्टेशन पर कुछ काम करते हैं, तो कुछ भीख मांगते हैं, कुछ नशा करने के लिए चोरी करते हैं, कुछ शाहोदागिरी या अन्य कार्य जिन्हें हम और आप सही नहीं मानते हैं! परन्तु इनके लिए सब सही है व वक़्त की मांग है!
बडकू और छोटू भी उन्ही के साथ रहने लगे और दिनों भर स्तैओं पर भीख मांगने लगे! दिनों भर कीबाद भी शायद की भर पेट भोजन मिल पाता था! एक बार ऐसे ही भीख मांगने हेतु, बडकू ने एक यात्री ट्रेन में झाडू लगाई व छोटू ने सबके सामने हाथ फैलाए! कुछ यात्रियों ने आठ आने या रूपये दिए, कुछ ने गालियाँ दी, कुछ ने नसीहत दी, कुछ ने नज़रंदाज़ किया और कुछ ने दुत्कार दिया! छोटू की आँख से आंसू छलक आये! नन्ही सी जान और इतना अपमान व गाली सुनकर वह रोने लगा! उसी दिनों रात में पता चला किरंगा ने पैसे ले कर पिंकी और गुडिया को किसी के साथ भेज दिया है! रंगा ने सभी को बताया कि-“पिंकी और गुडिया कि किस्मत बदल जायेगी! वह उन्हें बहुत अच्छे से रखेगा!” अब अच्छे से रखने का तात्पर्य आप खुद ही समझ सकते हैं! कुछ दिनों पश्चात् पता चला कि पिंकी से जबरन देह व्यापर करवाया जा रहा है व गुडिया कि कोई खबर नहीं है!
एक दिनों जब छोटू और बडकू अपने ठिकाने पहुंचे तो उनकी जेब में कुछ भी न था! आज उनकी कमाई एक चौकीदार ने उन्हें धमका के ले ली थी! तभी वह हीरो आया और सबको मिठाई खिलाने लगा! पूछने पर पता चला कि आज हीरो ने एक बहुत ही बड़ा हाथ मारा है और उसी कि ख़ुशी में वह झूम रहा है! पुलिस ने उसे पकडा पर फिर कुछ लें दें कर के छोड़ दिया! बडकू ने हीरो से कहा-
“तुमने चोरी की?”
“चोरी तो सभी करते हैं, बड़ा हो या छोटा! आज के ज़माने में सभी चोर हैं कुछ इज्ज़तदार चोर तो कुछ अपने जैसे!”
छोटू ने हीरो से प्रभावित हो कर कहा “दादा क्यूँ न हम भी हीरो के साथ कल से जाया करें?”
“नहीं चोरी करने गलत बात है! हम पैसे कमाने के लिए कुछ और कार्य करेंगे!”
अगले दिन बडकू सुबह सुबह ही काम की तलाश में निकल गया! एक दूकान वाले ने उसे भोझा खींचने का कार्य दिया! छोटू और बडकू ने किसी तरह काम पूरा किया तो दुकान वाले ने तय पैसे से कम पैसे बडकू के हाथ में थमा दिए! जब बडकू ने उससे सवाल किया तो उसने उसेगाल पर थप्पड़ रसीद दिया! छोटू यह देख कर रोने लगा! बडकू ने उसे चुप कराया और वहां से चलता बना! समाज की यह एक सच्चाई है की कमज़ोर को हर व्यक्ति दबाता है! यह प्रक्रिया ऊपर से लेकर नीचे तक होती है! कमज़ोर की कोई पैरवी भी नहीं करता! ऐसा प्रतीत होता है की एक गरीब व कमज़ोर के लिए कोई स्थान नहीं है! तभी तो आज बडकू के हक के पैसे भी उसे न मिले!
बडकू तो अपना आप को संभल लिया पर छोटू की सहनशीलता जवाब दे चुकी थी और अगली सुबह वो हीरो के साथ काम् पर निकल गया! आज एक और बच्चा समाज की भेंट चढ़ गलत राह पर चला गया! क्या हं बडकू को भी उस राह पर जाने से रोक सकते हैं?
आज हमारी सरकार  बाल विकास के लिए कई योजनायें चला रही है पर कही न कही अभी इस दिशा में बहुत कुछ करना है! जरूरी है की सर्कार अपने लक्ष्य को फिर से निर्धारित करे! समाज को भी चाहिए की वो इन बच्चों के प्रति अपने रुख में बदलाव लाये! अगर हर पारी पूर्ण व्यक्ति एक भी बच्चे की ज़िन्दगी में अच्छे बदलाव ला सकता है तो उसे प्रयत्न अवश्य करना चाहिए! अपने देश के भविष्य को सँवारने के लिए हम सभी को एक जुट होना ही होगा!

गाँव में जब पिछले वर्ष बाढ़ ने तबाही मचाई तो उसमे भजनलाल का घर भी डूब गया! उसकी बीवी चल बसी और अभी कुछ दिनों पूर्व वह भी हैजे की भेंट चढ़ गया! भजनलाल मजदूरी कर के अपना घर चलता था पर अब उसके जाने के बाद उसके दोनों बेटे सड़क पर आ गए हैं और भीख मांगने पर विवश हैं! बडकू १२ साल का है जबकि छोटू तो अभी सिर्फ ५ साल का है! गाँव से भीख मांगते मांगते आज शहर के रेलवे स्टेशन पर आ पहुंचे हैं! पिछले ३-४ महीनों में उनका गुजरा लोगों की दया से हुआ है और आज उनकी कैफियत बहुत ही बेचारी हो चली है! बडकू तो समझदार है पर छोटू के लिए ज़िन्दगी की यह ज़ंग समझ से परे है! हर पल सिर्फ अम्मा और बाप्पा के बारे में पूछता रहता है!

स्तातीओं पर एक दिनों उनकी मुलाक़ात हीरो से हुई! हीरो एक अनाथ बालक है जो रेलवे स्टेशन पर ही पला और बड़ा हुआ है! वह अपने ही जैसे कुछ लड़के-लड़कियों के साथ स्टेशन पर रहता है! इन सब बच्चों का मालिक है रंगा! जब यह बच्चे रंगा के पास आये थे तब बिलकुल मासूम थे पर आज इनमे से अधिकतर ज़िन्दगी की कठिन राह पर छ्हलना सीख चुके हैं पर जिस राह पर वोह चल रहे हैं वह सही है या गलत, ये उन्हें समझाने वाला कोई नहीं है! यह बच्चे स्टेशन पर कुछ काम करते हैं, तो कुछ भीख मांगते हैं, कुछ नशा करने के लिए चोरी करते हैं, कुछ शाहोदागिरी या अन्य कार्य जिन्हें हम और आप सही नहीं मानते हैं! परन्तु इनके लिए सब सही है व वक़्त की मांग है!

बडकू और छोटू भी उन्ही के साथ रहने लगे और दिनों भर स्तैओं पर भीख मांगने लगे! दिनों भर कीबाद भी शायद की भर पेट भोजन मिल पाता था! एक बार ऐसे ही भीख मांगने हेतु, बडकू ने एक यात्री ट्रेन में झाडू लगाई व छोटू ने सबके सामने हाथ फैलाए! कुछ यात्रियों ने आठ आने या रूपये दिए, कुछ ने गालियाँ दी, कुछ ने नसीहत दी, कुछ ने नज़रंदाज़ किया और कुछ ने दुत्कार दिया! छोटू की आँख से आंसू छलक आये! नन्ही सी जान और इतना अपमान व गाली सुनकर वह रोने लगा! उसी दिनों रात में पता चला किरंगा ने पैसे ले कर पिंकी और गुडिया को किसी के साथ भेज दिया है! रंगा ने सभी को बताया कि-“पिंकी और गुडिया कि किस्मत बदल जायेगी! वह उन्हें बहुत अच्छे से रखेगा!” अब अच्छे से रखने का तात्पर्य आप खुद ही समझ सकते हैं! कुछ दिनों पश्चात् पता चला कि पिंकी से जबरन देह व्यापर करवाया जा रहा है व गुडिया कि कोई खबर नहीं है!

एक दिनों जब छोटू और बडकू अपने ठिकाने पहुंचे तो उनकी जेब में कुछ भी न था! आज उनकी कमाई एक चौकीदार ने उन्हें धमका के ले ली थी! तभी वह हीरो आया और सबको मिठाई खिलाने लगा! पूछने पर पता चला कि आज हीरो ने एक बहुत ही बड़ा हाथ मारा है और उसी कि ख़ुशी में वह झूम रहा है! पुलिस ने उसे पकडा पर फिर कुछ लें दें कर के छोड़ दिया! बडकू ने हीरो से कहा-

“तुमने चोरी की?”

“चोरी तो सभी करते हैं, बड़ा हो या छोटा! आज के ज़माने में सभी चोर हैं कुछ इज्ज़तदार चोर तो कुछ अपने जैसे!”

छोटू ने हीरो से प्रभावित हो कर कहा “दादा क्यूँ न हम भी हीरो के साथ कल से जाया करें?”

“नहीं चोरी करने गलत बात है! हम पैसे कमाने के लिए कुछ और कार्य करेंगे!”

अगले दिन बडकू सुबह सुबह ही काम की तलाश में निकल गया! एक दूकान वाले ने उसे भोझा खींचने का कार्य दिया! छोटू और बडकू ने किसी तरह काम पूरा किया तो दुकान वाले ने तय पैसे से कम पैसे बडकू के हाथ में थमा दिए! जब बडकू ने उससे सवाल किया तो उसने उसेगाल पर थप्पड़ रसीद दिया! छोटू यह देख कर रोने लगा! बडकू ने उसे चुप कराया और वहां से चलता बना! समाज की यह एक सच्चाई है की कमज़ोर को हर व्यक्ति दबाता है! यह प्रक्रिया ऊपर से लेकर नीचे तक होती है! कमज़ोर की कोई पैरवी भी नहीं करता! ऐसा प्रतीत होता है की एक गरीब व कमज़ोर के लिए कोई स्थान नहीं है! तभी तो आज बडकू के हक के पैसे भी उसे न मिले!

बडकू तो अपना आप को संभल लिया पर छोटू की सहनशीलता जवाब दे चुकी थी और अगली सुबह वो हीरो के साथ काम् पर निकल गया! आज एक और बच्चा समाज की भेंट चढ़ गलत राह पर चला गया! क्या हं बडकू को भी उस राह पर जाने से रोक सकते हैं?

आज हमारी सरकार  बाल विकास के लिए कई योजनायें चला रही है पर कही न कही अभी इस दिशा में बहुत कुछ करना है! जरूरी है की सर्कार अपने लक्ष्य को फिर से निर्धारित करे! समाज को भी चाहिए की वो इन बच्चों के प्रति अपने रुख में बदलाव लाये! अगर हर पारी पूर्ण व्यक्ति एक भी बच्चे की ज़िन्दगी में अच्छे बदलाव ला सकता है तो उसे प्रयत्न अवश्य करना चाहिए! अपने देश के भविष्य को सँवारने के लिए हम सभी को एक जुट होना ही होगा!

10 Pillars of Development

Dr Kalam defined the 10 pillars of development; he said that, if India is determined, these targets can be achieved by the year 2020:

1. A nation where the rural and urban divide has been reduced to a thin line.

2. A nation where there is equitable distribution and adequate access to energy and quality water.

3. A nation where agriculture, industry and service sector work together in symphony.

4. A nation where education is not denied to any meritorious candidate because of societal or economic discrimination.

5. A nation which is the best destination for the most talented scholars, scientists and investors.

6. A nation where the best of healthcare is available to all.

7. A nation where the governance is responsive, transparent and corruption free.

8. A nation where poverty has been totally eradicated, illiteracy removed and crimes against women and children are absent and none in the society feel alienated.

9. A secure nation devoid of terrorism, peaceful land happy; a nation that continues with a sustainable growth path.

10. Finally a nation that is one of the best places to live in and is proud of its leadership.

Source: REDIFF

Hindi Poem: Ab Hausla Kam nahi Hoga!

This poem is dedicated to all the protesters who have decided to come out on road demanding stringent action against the rapists in Delhi gang rape case. This fight is now more about the government’s and police apathy and seriousness with which crime of rape is dealt with in our country.

हक के लिए फिर शंखनाद होगा
सड़को पर फिर लोगों का हुजूम होगा
कर ले सरकार सारी तैयारी
अब तो फैसला हो कर रहेगा

जा रहा हूँ मैं अपना अधिकार मांगने
चल जाए लाठी या आंसू गैस के गोले
सच के लिए अब हर बलिदान होगा

महामहिम और महामौन, चुप्पी से काम नहीं होगा
देखते हैं कब तक चेहरा छिपा सकते हैं ये सियासतदान
हमारा हौसला अब कम न होगा

इस बार विकल्प कोई और नहीं है
माताओं और बहनों की इज्ज़त से बढ़कर कुछ और नहीं है
खादी और खाकी की साठ-गांठ का
अब असर हम पर नहीं होगा

अबकी उदासीनता दिखी तो
लहू ये और उत्तेजित होगा
सीने की ज्वाला भड़केगी
हिंसा-अहिंसा के पाठ का कोई फायदा नहीं होगा

कर ले सरकार सारी तैयारी
अब तो फैसला हो कर रहेगा

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Hindi Poem: Khud Ko haara mehsoos karta hoon!

न जाने क्यूँ ऐसा प्रतीत होता है
जीवन एक दौड़ के सिवा कुछ भी नहीं है
हर व्यक्ति एक धावक है
वो जीतने के लिए कुछ भी कर सकता है
ये दौड़ है – औरों से आगे निकलने की
पर इस दौड़ को कोई अंत नहीं है
शायद इसी लिए आज हमारे मुख पर कृत्रिम मुस्कान है
आस-पास सब कुछ अनैसर्गिक है
स्वार्थपरता इतनी बढ़ गयी है
की अपने आगे हम किसी को देख ही नहीं पाते
खुद की सम्पन्नता से ज्यादा हमें औरों की असफलता की ख़ुशी है
किसी और का दर्द, दुःख, मजबूरी हमें सताता नहीं है
गैरों की बात क्या, इस दौड़ में अपने पीछे छूट रहे हैं
और हम अंधों की तरह माला के मोती तोड़ते जा रहे हैं
अनुराग और अदब भूल गए हैं
रिश्ते नाते सफलता की सीढ़ी के लिए कुर्बान कर रहे हैं
पैसे कमाने की भूख ने हमें भावशून्य कर दिया है
ये सामाजिक पतन का सूचक है
नैतिकता अब हमारे यहाँ घर करती नहीं
यथार्थ जीवन में स्नेह एवं भावना खो गयी है
एहिक जीवन की चाह में हम तन्हा रह गए हैं
समय के अभाव में सारे बंधन कमज़ोर पड़ रहे हैं
इतना खोने की बाद भी हमें कहाँ जाना है इसका इल्म नहीं है
पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो सोचता हूँ
इतना पाने के बाद भी जीवन नीरस है
इस आप-धापी में कागज़ के टुकड़े तो बहुत जुटाए
तमन्ना थी सच्ची ख़ुशी पाने की पर वो कहीं रूठ गयी
अब तो बस अकेलापन और उदासीनता मन में बसर करती है
भटक गया हूँ सांसारिक सुख को ग्रहण करने की लालसा में
मैं शतरंज की बिसात का वो राजा हूँ जो अपनों को खो चुका है
अपना दायित्व और कर्तव्य न निभा पाने का दर्द
अब शूल की तरह कलेजे को भेदता है
चाह कर भी अब हालात बदल नहीं सकता हूँ
व्यर्थ के लौकिक आनंद में अनासक्त हो गया हूँ
इतना पाने के बावजूद इस दौड़ में खुद को हारा महसूस करता हूँ
खुद को हारा महसूस करता हूँ….. खुद को हारा महसूस करता हूँ…..

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Motivational Hindi Poem: Kiya tha Agaaz hausle ke saath!

किया था आगाज़ हौसले के साथ
हर चुनौती को देते गए तुम जवाब
मंजिल का लम्बा सफ़र
रास्तो के पत्थर को पार करते हुए
आज इतने करीब पहुँच कर
तू थक नहीं सकता
बहुत पड़े हैं थपेड़े किन्तु
संकल्प शिथिल नहीं पड़ सकता
पुनः विजय निश्चय करना है
किया था आगाज़ हौसले के साथ
अंजाम को आगाज़ से भी भव्य करना है!!

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Hindi Poem: Desh Bech Khayenge!

walmart-tesco-carrefour-indiaभारत  नीलामी  का  इरादा  जबसे  पक्का किया  है
महामौन सिंह  के  मुख  से  अलफ़ाज़  निकलने  लगे  हैं
Walmart Carrefour Tesco के  भारत  प्रवेश  के  लिए  कुछ  भी  कर  जायेंगे
ज़रुरत  पड़ी  तो  भारत  बेच  खायेंगे
हमने  लूटा  तो  बहुत  पर  भूख अभी बाकी है
कोयले  की  खदानों  से  निकला  धन  अभी  नाकाफी  है
अब  तो  reforms के  नाम  पर  चपत  लगायेंगे
विदेशी  कम्पनियों  से  dollar  में  कमाएंगे
जहन्नुम  में  जाए  देश  हम  तो  अमेरिका  का  पकड़  कर  हिलाएंगे
लोग  एक  दो  महीने  सड़क  पर  मोर्चा  निकालेंगे  फिर  adjust हो  जायेंगे
हर  बार  की  तरह  इस  बार  भी  कुछ  नहीं  होगा
यही  सोचकर  सभी  अपने  घर  में  दुबक  कर  रह  जायेंगे
मीडिया  वाले  वाद -विवाद  प्रतियोगिता  करवा  कर  TRP बढ़ाएंगे
लेकिन समाधान नहीं बता पायेंगे
और  इंडिया  की  हालत  को  गाली  देते हुए  चुप-चाप  रह  जायेंगे
पर  अपनी  comfort zone से  बहार  हम  कभी  नहीं  आयेंगे
जिनको  अभी  भी  फर्क  नहीं  पड़ता  वो  क्या  घंटा  देश  बनायेंगे
चलिए  अब  बहुत  वक़्त  ज़ाया  हो  गया  अब  अमेरिका  में  ही  स्वतंत्रता  दिवस  मनाएंगे!!

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Hindi Poem: Vartman ka Launda!!

हिन्दुस्तान में वर्तमान का लौंडा सबसे हारा हुआ है

ये वो लौंडा है जिसे अपने चेहरे पर लज्जा है

जिसे उसने FAIR & HANDSOME से सजा रखा है

रंग के नाम पर भेदभाव को विदेशी कम्पनी ने जब बढाया

तब हमने दोनों हाथ खोल उसे गले लगाया

जिस देश के बेटों ने सदियों तक उसका गौरव बढाया

आज उन्ही बेटों के बड़े हिस्से ने खुद को

लौंडिया के नाम पर लुटाया

कभी भी हार न मानने के जज्बे को

इश्क की चिड़िया ने हवा में उड़ाया

METROSEXUAL बनने की होड़ में अपनी MASCULINITY को गंवाया

GLOBALIZATION के दौर में हमने अपनी अस्मिता को भुलाया

अपनी संस्कृति, विचार और आदर्शों को ठोकर मार गिराया

विदेशी ज़मीन पर बसने की तमन्ना ने

सरज़मीन-ऐ-हिंदुस्तान को बहुत रुलाया

माँ-बाप घर परिवार छोड़

उस लौंडे ने सारा ध्यान कागज़ के चंद टुकडों को कमाने में लगाया

आज वो इतना थक चुका है

की उसे मुल्क की पुकार सुनाई नहीं देती

उदासीन रवैये ने शहीदों की रूह को छलनी किया

जो आजादी मुफ्त में मिली थी उसे मिट्टी में मिलाया

आज के लौंडे ने अपनी मर्दानगी को कमजोरों पर दिखाया

जब बात आई सीने पर गोली खाने की

तो देख कैसे अपनी पीठ दिखाया

ये वही देश है जहाँ पर वीर रस गाये जाते थे

आज उसी धरती पर क्रांतिकारियों को गाली दी जाती है

और आतंकियों को नेता, जनता के पैसे की बिरयानी परोसते हैं

और ये सब देख कर भी लौंडे की ज़बान खुलती नहीं

क्यूंकि हिन्दुस्तान में वर्तमान का लौंडा सबसे हारा हुआ है!!

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Poem: Sansad ke 60 Saal!

आज सदन ने ६० साल पूरे किये हैं

इस अवसर पर विशेष बैठक बुलाई गयी

सांसदों के बौद्धिक कथनों को सुनकर मैं हैरान हो गया

अरे एक ही दिन में ये परिवर्तन कैसे आ गया

कल ही तो सभी एक ६३ साल पुराने कार्टून पर गुर्रा रहे थे

आज वही संसद की गरिमा की बात कर रहे थे

हैरान परेशान मैंने चैम्प को फोन लगाया

पूछा भाई एकता को देखा

कौनसी एकता: मुंबई वाली या लखनऊ वाली

मैंने कहा नहीं यार दिल्ली वाली

दिल्ली में हम किसी एकता को जानते है क्या?

नहीं भाई आज ही दिखी है संसद में

संसद में?

हाँ भाई संसद में, वो भी सांसदों के बीच

क्या बात कर रहा है

सही बात कर रहा हूँ, वो भी सबके सामने

यकीन नहीं होता

पहले तो ये एकता सिर्फ खुद की

तनख्वा और भत्ते बढ़ाने के लिए दिखती थी,

वो भी परदे के पीछे

आज ये बदलाव कैसे आ गया?

संसद के ६०वी वर्षगाँठ पर

देश को फिर से “बनाने” का प्रोग्राम है

तभी तो गरिमा का प्रस्ताव भी पारित हो गया

यार अब ये गरिमा कहाँ से आ गयी?

कहीं ये वही गरिमा तो नहीं

जिसे २००८ में अमर सिंह संसद से बाहर फेंक कर आया था

हाँ भाई ये वही वाली है

और सांसदों ने ये भी कसम खायी है की

वो संसद की कार्यवाही में बाधा नहीं डालेंगे

ऐसा तो मुमकिन ही नहीं है

क्यूँ यार?

अगर संसद स्थगित नहीं होगी तो वहां बैठ कर हमारे संसद करेंगे क्या

उनके पास तो सिर्फ अपनी प्रगति की नीति और प्रस्ताव हैं

देश उन्नति और सेवा की बात करनी पड़ी तो वे अटपटा महसूस करेंगे

देश से तो उनका मीलों तक कोई नाता नहीं है भाई

संसद स्थगित, सांसद बाहर,

चाय-पकौड़े खाए, जनता के पैसे उड़ाए और संसद सत्र समाप्त!

६० सालों में लोकतंत्र में बदलाव आया है

सांसदों के व्यवहार और सोच में बदलाव आया है

देश सेवा की परिभाषा में बदलाव आया है

देश-उन्नति की बात अब बेमानी लगती है

दुआ करता हूँ की सांसदों में शर्म आये

अपनी नहीं तो संसद की लाज बचाएँ!!

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Poem: Man Without Courage!

You man, without courage
have lost your right to live
You claim to belong to a civilized society
but you turned blind eye
when the society was being torn apart
you succumbed to the pressure
when you were required to stand
you became defunct
when the duties were to be performed
you got intimidated
when you were needed the most
you have become a liability to the same “civilized” society
You are “Man” without courage
And there is no justification for that
There shall be no funeral for you
as deep inside you, you are already dead!

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Get out and VOTE

Voting is our given right,
which men have died to keep.
Voting shows our peoples might,
so our country won’t get into deep.

But there are those who never vote,
and constantly seem to complain.
Patriotism they don’t promote,
and their rights they choose to abstain.

Every vote does really count,
to let our officials know.
For their actions they must account,
or their ratings will never grow.

So come next election time,
go cast your vote with pride.
Voting doesn’t cost a dime,
plus the out come you help decide.

(Written by Bernard Howe)